हम पेड़ नहीं अपनी साँसें काट रहे है
पेड़ बचाइए, अपना भविष्य बचाइए
बचपन से ही मेरी रुचि पेड़ों की ओर रही है। स्कूल की किताबों में हमेशा पढ़ा कि पेड़ों की कटाई से प्रकृति को बहुत नुकसान होता है। जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मुझे यह एहसास हुआ कि यह केवल किताबों की बात नहीं, बल्कि हमारे जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।
वास्तव में, हम जीवित हैं तो पेड़ों की वजह से। यदि धरती से सारे पेड़ खत्म हो जाएँ, तो हम साँस कैसे लेंगे? हम सभी जानते हैं कि हमें जीवनदायी ऑक्सीजन पेड़ों से मिलती है, फिर भी हम लगातार उन्हें काटते जा रहे हैं।
मुझे आज भी बचपन की एक कहानी याद है, जो मैंने शायद पाँचवीं या छठी कक्षा में पढ़ी थी। वह कहानी थी अमृता देवी बिश्नोई की। उन्होंने कहा था—
"सिर सांटे रूंख रहे, तो भी सस्तो जाण।"
अर्थात, यदि पेड़ बचाने के लिए सिर भी कट जाए, तो भी यह सस्ता सौदा है। उन्होंने केवल यह कहा ही नहीं, बल्कि पेड़ों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान भी दे दिया। यह हमें सिखाता है कि प्रकृति के प्रति सच्चा प्रेम केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से साबित होता है।
आज हम "पेड़ बचाओ" जैसे अभियान तो चलाते हैं, लेकिन क्या वास्तव में पेड़ों की कटाई रुकी है? नहीं। आज भी जंगलों में चोरी-छिपे पेड़ काटे जाते हैं। विकास और सुविधाओं के नाम पर हर दिन हजारों पेड़ धराशायी हो रहे हैं।
फर्नीचर और अन्य आवश्यकताओं के लिए लकड़ी की जरूरत पड़ती है, लेकिन इसका सबसे अच्छा समाधान यही है कि जितने पेड़ हम उपयोग करें, उससे कहीं अधिक पेड़ लगाएँ। जहाँ भी उचित स्थान मिले, वहाँ एक पौधा अवश्य लगाएँ। आज लगाया गया एक छोटा-सा पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का आधार बनेगा।
जहाँ पेड़ होते हैं, वहाँ पक्षियों का मधुर कलरव सुनाई देता है। गाय, बकरियाँ और अन्य जीव उनकी छाया में विश्राम करते हैं। पेड़ों से भरा वातावरण मन को शांति देता है। मुझे हमेशा ऐसा महसूस होता है कि किसी शांत स्थान पर पेड़ की छाँव में बैठते ही सारी थकान, चिंता और तनाव जैसे अपने-आप दूर हो जाते हैं। पेड़ों के नीचे एक ऐसी सुकून भरी शांति होती है, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता।
हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि जब हम एक पेड़ काटते हैं, तो केवल एक तना नहीं गिरता, बल्कि हमारी साँसें, हमारा पर्यावरण और हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी कमजोर होता है।
आइए, केवल "पेड़ बचाओ" का नारा न लगाएँ, बल्कि हर वर्ष कम-से-कम एक पेड़ अवश्य लगाएँ और उसकी देखभाल भी करें। क्योंकि पेड़ बचेंगे, तभी जीवन बचेगा; पेड़ बचेंगे, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।
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लेखिका: दीक्षा
यह लेख पूरी तरह दीक्षा की मौलिक रचना है। लेखक की पूर्व लिखित अनुमति के बिना इस लेख का पूर्ण या आंशिक रूप में पुनर्प्रकाशन, प्रतिलिपि, वितरण या व्यावसायिक उपयोग प्रतिबंधित

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