AI

वर्तमान में मैंने पाया है कि लोग AI का काफी उपयोग कर रहे हैं। AI लोगों की काफी मदद कर रहा है। AI से हम घंटों का काम मिनटों में कर पा रहे हैं। लेकिन यह किस हद तक सही है? हम कभी-कभी एक मैथ्स का सवाल एक-एक घंटे में सॉल्व कर पाते थे और सोचते रहते थे। अब कोई उत्तर नहीं आ रहा, तो तुरंत AI का उपयोग किया और उत्तर सामने होता है। लेकिन क्या हमने सोचा है कि इससे हमारी सोचने की क्षमता पर कितना असर हो रहा है? और इससे बच्चों पर कुछ ज़्यादा ही प्रभाव पड़ रहा है। पहले कोई भी प्रोजेक्ट के लिए अपने दिमाग का उपयोग करते थे, लेकिन शायद AI के कारण हम अपना दिमाग कम ही उपयोग कर रहे हैं। और यह सही नहीं है। इससे हमारी आने वाली पीढ़ी की सोचने-समझने की क्षमता पर काफी प्रभाव पड़ेगा। जिस तरह मशीन का उपयोग न होने पर वह जाम हो जाती है, उसी प्रकार इंसानी दिमाग भी धीरे-धीरे कम सक्रिय हो सकता है। और सबसे ज़्यादा प्रभाव पड़ेगा हमारी सृजन क्षमता पर। बच्चे जो वैज्ञानिक बनकर या अन्य क्षेत्रों में नए-नए आइडिया लाते थे, वह कम हो जाएंगे, क्योंकि यदि वे पूर्ण रूप से AI पर निर्भर रहेंगे, तो इससे भविष्य में हमारी पीढ़ी पर बुरा असर पड़ सकता है। लेकिन इसका यह अर्थ भी नहीं है कि AI पूरी तरह गलत है। यदि हम इसका उपयोग केवल सहायता के लिए करें और अपनी सोच, मेहनत तथा समझ का भी बराबर उपयोग करें, तो AI हमारे लिए एक उपयोगी साधन बन सकता है। समस्या AI में नहीं, बल्कि उसके गलत या अत्यधिक उपयोग में है। इसलिए AI का उपयोग करना चाहिए, लेकिन अपनी सोचने, समझने और नई चीज़ें सीखने की क्षमता को कभी भी कम नहीं होने देना चाहिए। तकनीक हमारी मदद करे, हमारी जगह सोचना शुरू न कर दे—इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है। ©® दीक्षा

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