में लिखती हूं, पर में क्यों लिखती हुं

में आज तक ये नहीं समझ पाई कि में क्यों लिखती हु कुछ लोगों ने कहा कि में जो लिखती हु उसमें दम नहीं है क्योंमेरे जो टॉपिक होते है वो ज्यादातर प्रकृति के लिए या सामाजिक मुद्दों पर होते है । इसलिए कुछ तो मेरे मुंह पर ही कह देते हैं आज के जमाने में जो आप लिखती हो उसको कोई पसंद नहीं करता । आप उन मुद्दों पर लिखो जिन में लोग इंटरेस्ट लेते है पर फिर भी मुझे आदत है जो मैं करती हु जो मेरा मन कहता है मेरा दिल कहता लोगों के लाख कहने पर मेरे मन में कभी परिवर्त नहीं आता ना ही ही मुझे कोई असर होता है जबकि कही न कही ये सच है कि में जो लिखती हु उन मुद्दों पर सच में लोग ज्यादा रुचि नहीं दिखते फिर भी में भी करती हु वही लिखती हु जो मुझे लिखना होता आज के जमाने मै खैर में भी इसी जमाने की हु फिर भी में चंद लालच ओर लोभ में आकर अपने उसूल नहीं बदलती हां में जानती हु कि आज की जनरेशन कपसंद करती है ओर ओर क्या लिखने से लोग अट्रैक्ट होगे फिर भी में ऐसा कभी नहीं करूंगी अगर कोई एक व्यक्ति भी मुझे सुनता है पढ़ ता है तो में खुश हु लेकिन आज के जमाने ओर लोगों का हिसाब ही अलग है जो मर्यादाएं तोड़ता है उसी कारण हम न्यूज में नई नई ओर दिल दहलाने वाली खबरें सुनते है। तो मकहूँगी की उन तत्वों को काम कर देना ही उचित है जिस से जन धन की हानि होती है ओर हमारी।वर्तमान।ओर आगामी पीढ़ियों पर बुर असर पड़ता ही ©®दीक्षा

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