अखबार : जानकारी का माध्यम या केबल मनोरंज

समाचार: जानकारी का माध्यम या केवल मनोरंजन? समाचार किसी भी समाज का दर्पण होते हैं। वे केवल घटनाओं की जानकारी नहीं देते, बल्कि लोगों को जागरूक, सतर्क और जिम्मेदार भी बनाते हैं। बदलते समय के साथ समाचारों का स्वरूप भी बदल गया है। पहले लोग सुबह समाचार पत्र का इंतज़ार करते थे, लेकिन आज मोबाइल फोन पर एक क्लिक करते ही दुनिया भर की खबरें हमारे सामने होती हैं। कई बार तो कोई समाचार न्यूज़ चैनलों पर प्रसारित होने से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो जाता है। मेरे अनुसार समाचारों का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य लोगों को समय रहते सही जानकारी देना है। मौसम की चेतावनी, बाढ़, तूफ़ान, भूकंप, महामारी या किसी अन्य आपदा से जुड़ी खबरें अनगिनत लोगों की जान बचा सकती हैं। यदि हमें पहले से पता हो कि किसी स्थान पर प्राकृतिक आपदा आने वाली है, तो हम सावधानी बरत सकते हैं और अनावश्यक जोखिम से बच सकते हैं। ऐसे समाचार वास्तव में समाज के लिए अमूल्य हैं। लेकिन आज समाचारों की दुनिया का एक दूसरा पक्ष भी है। कई बार घंटों तक किसी सेलिब्रिटी के जन्मदिन, उनके कपड़ों, खान-पान या निजी जीवन को प्रमुख समाचार बनाकर दिखाया जाता है। इसमें कोई बुराई नहीं है, क्योंकि हर व्यक्ति की अपनी पसंद होती है और मीडिया वही दिखाता है जिसे लोग अधिक देखते हैं। मेरा उद्देश्य किसी का विरोध करना नहीं है, बल्कि केवल अपने विचार रखना है। मेरा मानना है कि जितनी जगह मनोरंजन से जुड़ी खबरों को मिलती है, उतनी ही जगह उन लोगों और समस्याओं को भी मिलनी चाहिए जो वास्तव में सहायता और ध्यान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आज भी हमारे देश के कई क्षेत्रों में पानी की कमी, शिक्षा का अभाव, बेरोज़गारी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और अन्य गंभीर समस्याएँ मौजूद हैं। यदि इन मुद्दों को अधिक प्रमुखता मिले, तो शायद समाज और सरकार दोनों का ध्यान उनकी ओर अधिक जाएगा और समाधान भी तेज़ी से निकलेंगे। कभी-कभी मैं सोचती हूँ कि यदि किसी साधारण व्यक्ति का एक छोटा-सा वीडियो पूरे देश में वायरल हो सकता है, तो हमारे देश की वास्तविक समस्याएँ क्यों नहीं? आखिर हर आवाज़ को सुना जाना चाहिए और हर समस्या को सामने आने का अवसर मिलना चाहिए। सच्चाई यह है कि मीडिया वही दिखाता है जिसे लोग देखना पसंद करते हैं। जहाँ दर्शकों की रुचि होती है, वहीं अधिक समय और संसाधन लगाए जाते हैं। इसलिए केवल मीडिया ही नहीं, बल्कि हम सभी भी कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार हैं। यदि हम सार्थक और जनहित से जुड़े समाचारों को महत्व देंगे, तो मीडिया भी उन्हें अधिक स्थान देगा। समाचारों का उद्देश्य केवल टीआरपी या मनोरंजन नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज को जागरूक करना, सही जानकारी पहुँचाना और उन आवाज़ों को मंच देना भी होना चाहिए जो अक्सर भीड़ में दब जाती हैं। जब समाचार जनहित को प्राथमिकता देंगे, तभी वे अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरी तरह पूरा कर पाएँगे। ©® दीक्षा

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