मन मोहक प्रकृति
मनमोहक प्रकृति
भाग 1हवाओं के आगमन परवृक्ष ऐसे उल्लसित हो उठते हैं,मानो किसी प्रिय मित्र के आने सेदूसरा मित्र आनंदित हो गया हो।
भाग 2दीर्घ अंतराल के बाद बरसने वाली वर्षा की बूँदेंशुष्क धरती में ऐसे समा जाती हैं,जैसे वर्षों बाद लौटी कोई सखीधरती का हाथ थामकरउसके आँगन में प्रवेश कर गई हो।
भाग 3प्रभात की बेला मेंप्रकृति अत्यंत शांत और सुकूनभरी होती है।विभिन्न पक्षियों का मधुर कलरव सुनाई देता है,मानो कोई संगीत-प्रेमीआँखें मूँदकर सुरों का रसास्वादन कर रहा हो।पक्षियों की चहचहाहट हीप्रकृति का अनुपम संगीत है।
भाग 4वृक्षों की डालियों और तालाबों के किनारों सेझाँकते नन्हे पक्षी-शावकमानो अपने घर की ऊँचाइयों सेप्रकृति की सुंदरता का अवलोकन कर रहे होंऔर कह रहे हों—
"हे प्रकृति!तुम कितनी मनमोहक और अनुपम हो।"
दीक्षा

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