रूढ़िवादिता

रूढ़िवादिता हम कितने भी आधुनिक क्यों न हो जाएँ, लेकिन कहीं न कहीं रूढ़िवादिता आज भी हमारे भीतर मौजूद है। मैं स्वयं भी कई बार इसका प्रभाव महसूस कर चुकी हूँ। यह समाज में इतनी गहराई से फैली हुई है कि कई बार लोग बिना सोचे-समझे उसकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं। एक दिन मैंने एक बुज़ुर्ग को कहते सुना, "घर में विपत्ति आने वाली है, क्योंकि हमारी कुलदेवी को मुर्गा या बकरा नहीं चढ़ाया गया। अगर हमने देवी को बलि नहीं चढ़ाई, तो कुछ भी अनिष्ट हो सकता है।" उस समय मैं काफी छोटी थी। उनकी बातें सुनकर मुझे भी लगा कि शायद सचमुच ऐसा ही होता होगा। कुछ दिनों बाद परिवार में निर्णय लिया गया कि एक शुभ मुहूर्त पर कुलदेवी को मुर्गा चढ़ाया जाएगा। सभी को विश्वास था कि ऐसा करने से देवी प्रसन्न होंगी और परिवार की सारी समस्याएँ समाप्त हो जाएँगी। बस फिर क्या था! पूरे परिवार ने तैयारियाँ शुरू कर दीं। दो-तीन लोग एक अच्छा, हट्टा-कट्टा मुर्गा खोजने निकल पड़े। काफी तलाश के बाद उन्हें अपनी पसंद का मुर्गा मिल गया। मोलभाव करके उसे खरीद लिया गया और बड़े आदर के साथ घर लाया गया। क्रमशः... ©® दीक्षा

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